Yusuf

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मन की पीड़ा

मन की पीड़ा :-

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लौट आवो आंसुओं की है मेरी सौगन्ध तुमको,
 रिमझिम का मौसम निमन्त्रण दे रहा है ।

कितने बरस गुज़रे तुम्हे देखा नहीं है,
नयन का सावन निमन्त्रण दे रहा है।

लगा कर सिन्दूर-बिन्दी,ख़ुद को सजाती हूं हर दिन,
लम्बी उम्र की तुम्हारी,कामना करती हूं हर दिन,
स्वस्थ रहो,खुशहाल रहो तुम,
याद दुआओं मे तुम्हे करती हूं हर दिन
लौट आवो आंसुओं की है मेरी सौगन्ध तुमको,
रिमझिम का मौसम निमन्त्रण दे रहा है ।

शुष्क है जीवन-चमन मधुमास मे भी,
मदमस्त हो मधु चन्द्र तुम्हे पुकारा रहा है।
आ जाओ,लौट आ जाओ,
विरहिन का हर पल निमन्त्रण दे रहा है,
लौट आवो‌ आंसुओं की है मेरी सौगन्ध तुमको,
रिमझिम का मौसम निमन्त्रण दे रहा है।

कितने बसन्त गुज़ारे तुम बिन,
कितने सावन बीत गये हैं,
ज़िन्दगी से दिल मेरा घबरा गया है,
लौट आवो सांसों के तारतम्य की सौगन्ध तुमको,
नयन का सावन निमन्त्रण दे रहा है ।

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5 Comments

Gobind Rijhwani "Anand"

17-Feb-2024 03:59 PM

दूसरों की रचना को ना लिखा करो

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Mohammed urooj khan

17-Feb-2024 03:07 PM

👌🏾👌🏾👌🏾

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बेहतरीन

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